अहमद रज़ा खान रहमतुल्लाह अलैह का हिंदी काव्य में योगदान
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हिन्दी काव्य में रोहिल्खंड के कवियों विशेषकर सूफी संतो का अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। जिनमे एटा जिले के मारेहरा के युगपुरुशो विशेषकर सय्यद आले रसूल मरेहरवी के परिवार का विशेष योगदान रहा है और उन्ही के आशीर्वाद से उनके अध्यात्मिक दीपक अर्थात मौलाना अहमद रज़ा खान साहब को ये काव्य सृजन विरासत में प्राप्त हुआ है हिन्दी काव्य में आपकी दो रचनाये बहुत प्रसिद्ध हैं जिनका अध्यन इस शोध पत्र में किया गया है तथा साथ ही हिन्दी मुहावरों का भी प्रकाश आपकी रचनाओं से बिखरता हुआ दिखाई देता है आला हज़रत ने अपनी कवित्त–शक्ति और अपार ऊर्जा से हिंदी–काव्य और मुहावरों के भंडार भर दिए हैं। इनकी काव्य–प्रतिभा ने न केवल साहित्यकारों,समीक्षकों और पाठकों को आकर्षित हीं किया, बल्कि सर्जना और नवीन कल्पनाओं की प्रेरणा भी दी। परन्तु हिन्दी साहित्य में जानकारी के आभाव या संस्कृतिक द्वेष ने हमको अध्यन से रोक रखा है जिस के कारण हम सूफी विचारवादी संतो को और उनके द्वारा सृजन की रसमय काव्य स्मृति को समझने से दूर रहे अतः मुस्लिम लेखको के द्वारा इतिहास का पुनर्लेखन आवश्यक है।



