five

निराला के काव्य में स्त्री विमर्श का स्वरूप- स्ंतोष कुमार मिश्र, डा0 सीमा सिंह

收藏
Zenodo2026-01-19 更新2026-05-29 收录
下载链接:
https://zenodo.org/doi/10.5281/zenodo.18301544
下载链接
链接失效反馈
官方服务:
资源简介:
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’हिंदी साहित्य के उन अग्रणी कवियों में हैं, जिन्होंने स्त्री को करुणा, विद्रोह, स्वाभिमान और मानवीय गरिमा के साथ प्रस्तुत किया। उनके काव्य में स्त्री केवल प्रेमिका या सौंदर्य की वस्तु नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय से संघर्ष करती, चेतन और आत्मसम्मान से युक्त मानव सत्ता है। प्रस्तुत शोध-पत्र में निराला के काव्य में स्त्री विमर्श के स्वरूप, उसकी वैचारिक पृष्ठभूमि, काव्यात्मक अभिव्यक्तियाँ और सामाजिक प्रासंगिकता का विश्लेषण किया गया है।
提供机构:
JAN KALYAN EVAM VIKAS SEVA SAMITI (Reg. No. : 871/2004) Rampur Udaybhan (Infornt of Electric Office) Ballia-277001 (U.P.) INDIA +91-9415254678; dr.upendrasingh@yahoo.in
创建时间:
2026-01-19
二维码
社区交流群
二维码
科研交流群
商业服务