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भारतीय संत और स्वतंत्रता आंदोलन

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Zenodo2024-06-22 更新2024-06-25 收录
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भूमिका :भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रेरक अध्याय है जिसमें हिंदू सन्यासी व मुस्लिम फकीरों ने हथियार उठाएं और दोनों ने मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी इसे भारत में सन्यासी फकीर विद्रोह के रूप में जाना जाता है स्वतंत्रता संग्राम में जिन लाखों साधुओं ने अपने लोकगीतों एवं लोक कथाओं के माध्यम से आजादी की लग जागी राखी भारतीय इतिहास के पाठ्यक्रमों से हुए विलुप्त हैं भारतीय इतिहास का नॉरेटिव बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया गया हैl  1947 में किसी नए देश ने जन्म नहीं लिया क्योंकि भारतवर्ष की परिकल्पना प्राचीन काल से ही रही है भारतीय संतों में सबसे प्रमुख स्वामी विवेकानंद हैं जो एक प्रखर चिंतक होने के साथ-साथ राष्ट्र अनुरागी संत भी थे वह भारत को विश्व गुरु का दर्जा दिलाने में कामयाब रहेl1 विवेकानंद अद्वैत वेदांत के महान प्रतिपादक थे विवेकानंद का व्यक्तित्व शक्तिशाली तेजस्वी तथा सर्वोत्तमुखी था यद्यपि उनका शरीर खिलाड़ियों की भांति गठीला और पुष्ट था फिर भी उन्हें प्लेटटिनस और स्पोनोजा की भांति रहस्य आत्मिक अनुभूति थी तथा उसे परमार्थ सत्य के साथ उनका सामंजस्य था2 जिसका विवेचन किया है जिस प्रकार में अमेरिकी महाद्वीप और यूरोप में जो विजय यात्राएं की थी उन्होंने लोगों को दिखला दिया कि हिंदुत्व एक बार पुनः शक्तिशाली हो गया है और वह विश्व में आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक दार्शनिक प्रचार करने के लिए कटिबध है अपनी इस वीरतापूर्ण प्रवृत्ति तथा दबंग चरित्र के कारण वे हिंदू नेपोलियन भी कहलाते थेl 3

提供机构:
Bhole, R.V
创建时间:
2024-06-22
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