प्राचीनकालीन भारतीय समाज में महिला षिक्षा- सुमित कुमार ओझा
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महिला शिक्षा किसी भी समाज के विकास का मुख्य मानक स्वीकार किया जाता है। किसी समाज के विकसित तथा सभ्य होने में वहां की महिलाओं का सुशिक्षित और सुसंस्कृत होना आवश्यक माना जाता है, क्योंकि एक महिला का अपने घर-परिवार से लेकर समाज के प्रति बहुत सारी जिम्मेदारियाँ होती हैं। कहा भी गया है कि, यदि एक महिला शिक्षित होती है, तब एक परिवार, एक पीढ़ी और एक समाज शिक्षित होता है। इस मंत्र को वैदिक काल में पूर्ण मान्यता प्राप्त थी और यही कारण था कि उस काल में महिला-पुरुष को समान शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार था। महिलाओं से ही उस काल में श्रेष्ठ उद्दात और महान् विचारों का प्रस्फुटन हुआ, जिनको ऋग्वेद की ऋचाओं में स्थान दिया गया। प्रस्तुत शोधपत्र में महिला शिक्षा में उन्हीं उपलब्धियों एवं देन को रेखांकित करते हुए वर्तमान में उसकी प्रासंगिकता का अन्वेषण किया गया है।



