कोविड के बाद अध्यापकों की समस्याओं का अध्ययन - डा0 दिनेश कुमार
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वृद्धि और विकास मानवजीवन की एक अति महत्वपूर्ण और अति आवश्यक प्रक्रिया है, इसके अभाव में मानवजीवन की संकल्पना करना, किसी अंधेरे कमरे में सुई खोजने के जैसा होगा। वृद्धि एक समय आते-आते रुक जाती है, किन्तु विकास मानव जीवन के अंतिम छोर तक चलता रहता है। पूरे विश्व के सभी सजीवों में वृद्धि और विकास होता रहता है इसीलिए उसका जीवन आगे बढ़ता है। मनोवैज्ञानिकों ने इसकी अपने तरीके से व्याख्या की है कुछ गर्भावस्था से प्रारम्भ मानते हैं तो कुछ मनोवैज्ञानिक जन्म के उपरान्त से मानते हैं, किन्तु विकास के अन्तर्गत सभी सजीवों में जीवन पर्यन्त कुछ न कुछ आगे बढ़ने की प्रक्रिया होती ही रहती है। शिक्षाशास्त्रियों ने इसे अपनी तरह परिभाषित किया और मनोवैज्ञानिकों की धारणाओं से जोड़ने का सफल प्रयास किया। विकास के इसी मानव जीवन के सफर में उसे अनेक समस्याओं का सामना भी करना पड़ता रहता है। मानव अपने नित नये विकास के मार्गपर आगे बढ़ता हुआ कीर्तिमान स्थापित करता रहा है।



