遇见数据集

समकालीन हिंदी कविता में विस्थापन की अभिव्यक्ति * मनीष कुमार जायसवाल

收藏
Zenodo2026-01-12 更新2026-05-26 收录
官方服务:

资源简介:

कविता सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक विधा है। प्रकृति के रहस्यों और सुखद दृश्यों का चित्रण करने के साथ ही साथ सामाजिक समस्याओं का चित्रण करना भी कविता का महत्वपूर्ण कार्य है। समकालीन हिंदी कविता में विस्थापन का विषय एक गहन मानवीय संवेदना के साथ उभरा है। यह केवल शारीरिक स्थानांतरण नहीं, बल्कि अस्मिता, स्मृति, और सांस्कृतिक टूटन की वह पीड़ा है जो व्यक्ति को आंतरिक और बाह्य दोनों स्तरों पर विखंडित करती है। कवियों ने इस विषय को न सिर्फ भौगोलिक पलायन के रूप में, बल्कि मनोवैज्ञानिक और सामाजिक उथल-पुथल के प्रतीक के तौर पर भी देखा है। आज लोगों को वैश्वीकरण, भूमंडलीकरण, औद्योगीकरण और उत्तर आधुनिकता के कारण विस्थापन करना पड़ा है। विस्थापन के कई कारण हैं, जैसे आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, औद्योगिक, सांप्रदायिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक। समकालीन हिंदी कविता में विस्थापन को एक बड़ी समस्या के तौर पर माना गया है। वर्तमान हिंदी कविता आम लोगों की कविता है। विस्थापन का सीधा अर्थ है स्थानांतरित होना। कभी यह हालात पर निर्भर करता है, तो कभी यह समस्या बलपूर्वक उत्पन्न की जाती है, तो कभी-कभी हम खुद इसे मान लेते हैं। विस्थापन कभी विवशता या बेहतर जीवन जीने की कोशिश का संकेत हो सकता है।

创建时间:
2026-01-12
二维码
社区交流群
二维码
科研交流群
商业服务