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मरियम की डायरी की ऐतिहासिक समीक्षा

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Zenodo2026-10-30 更新2026-11-05 收录
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31 मई 1857 का दिन भारत के इतिहास में गौरवशाली रहा है। इस रोज ईस्ट इंडिया कंपनी की देसी बटालियनों ने एक साथ अंग्रेजो के विरुद्ध विद्रोह हेतु दिन नियत किया था किंतु मेरठ में यह विद्रोह 10 मई को ही फूट पड़ा था। 12 मई को मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को पुनः भारतीय संप्रभुता का प्रतीक बनाकर अनेक जगहों पर अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई प्रारंभ हो गई।शुरू में इस लड़ाई का प्रतिनिधित्व देसी सैनिकों ने ही किया था किंतु शीघ्र ही भारत के अनेक राजा,जमींदार,सूफी संत,समाज के लोग इस लड़ाई में जुड़ते चले गये।रूहेलखंड में इस विद्रोह की तीव्रता सबसे अधिक थी।यहां के जिलों में मेरठ विद्रोह की खबर 15 मई को ही आ गई थी किंतु इन जिलों में 31मई तक शांति ही बनी रही। 31 मई के दिन अनेक देसी सैनिकों ने अंग्रेज अधिकारियों और अंग्रेज पलटन के विरुद्ध खूनी संघर्ष छेड़ दिया। बरेली के खान बहादुर खान को क्षेत्रीय विरोध का प्रतीक बनाया गया।शाहजहांपुर में भी 31 मई को चर्च पर हमला कर अंग्रेजी सत्ता को समाप्तप्राय कर दिया गया।इस रोज हुए रक्तपात में अनेक अंग्रेज अधिकारी और सैनिक मारे गए।अगले एक वर्ष तक जिला ब्रिटिश भारत से स्वतंत्र रहा।रक्तपात के इस माहौल में एक प्रेम कहानी भी जन्मी।ऐतिहासिक मरियम की डायरी उस प्रेम कहानी का विवरण उपलब्ध करवाती है जो विद्रोही सैनिक मंगल खान के मन में लेमेस्टियर परिवार की रुथ के लिए उभरा।प्रस्तुत शोधपत्र उस घटना के विवरण के साथ साथ मरियम डायरी के लिखे जाने के संदर्भ में विवरण देता है,साथ ही 1857 में घटी क्रांति की घटनाओं को भी समेटता है।

提供机构:
Zenodo
创建时间:
2026-10-30
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