दिव्यांगजनों की अवसंरचनात्मक संतुष्टि का विष्लेष्णात्मक अध्ययन- रूबी चैIधरी
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दिव्यांगजन भी एक सामाजिक प्राणी हैं और इस रूप में वे अनेक सामाजिक उत्तरदायित्वों एवं अधिकारों से जुड़े हुए हैं, जिसकी पूर्ति/प्राप्ति के लिए उन्हें विभिन्न स्थानों पर आना जाना पड़ता है अथवा अपने आवास पर क्रियाशील होना पड़ता है। एक दिव्यांग शारीरिक रूप से पूर्ण नहीं होता, जिससे उसके अनुकूल अवसंरचनात्मक निर्माण किया जाता है। इसका प्रावधान राजकीय स्तर पर सम्पन्न निर्माण कार्यों में किया गया है। प्रस्तुत शोधपत्र में इस बारे में सत्यान्वेषण के लिए निम्नांकित अवसंरचनात्मक ढ़ाँचे सम्बन्धी प्राथमिक तथ्यों का संकलन कर अध्ययन-विश्लेषण किया गया है- 1. दिव्यांगजनों के निजी आवास की अवसंरचनात्मक स्थिति। 2. रेलवे स्टेशन पर दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध अवसंरचनात्मक ढाँचा सम्बन्धी सुविधाएँ। 3. बस स्टेशन पर दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध अवसंरचनात्मक ढाँचा सम्बन्धी सुविधाएँ। 4. स्कूल/काॅलेज में दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध अवसंरचनात्मक ढाँचा सम्बन्धी सुविधाएँ। 5. चिकित्सालयों में दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध अवसंरचनात्मक ढाँचा सम्बन्धी सुविधाएँ। 6. जनपद के प्रशासन हेतु निर्मित विकास भवन में दिव्यांगजनों के लिए अवसंरचनात्मक सुविधाएँ। 7. कार्य-स्थल पर दिव्यांगजनों के लिए अवसंरचनात्मक सुविधाएँ।



