भारतीय संघवाद की संकल्पना- एक विवेचनात्मक विष्लेषण- आसिफ अली, प्रो0 (डाॅ0) कृष्णानन्द चतुर्वेदी
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समकालीन राजनीतिक व्यवस्था में संघावादी शासन प्रणाली का प्रचलन सामान्य हो गया है। इस शासन प्रणाली में ‘अनेकता में एकता‘ स्थापित करने एवं बहुलता, विविधता तथा राष्ट्रीयता की भावनाओं को एक साथ समायोजन करने की संकल्पना पर कार्य किया जाता है। ‘संघवाद’ शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘‘थ्म्क्म्त्।स्प्ैड‘‘ शब्द का पर्यायवाची है, जिसकी उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘थ्व्म्क्न्ै‘ से हुई है। ‘थ्व्म्क्न्ै‘ का तात्पर्य ‘संधि‘ या ‘समझौता’ होता है। ऐताहिसक साक्ष्यों का अवलोकन किया जाय, तो प्राचीन भारत की शासन व्यवस्था में संघवादी के लक्षण मिलते हैं। कौटिल्य ने अपनी अमर कृति अर्थशास्त्र में ‘संघ’ का उल्लेख विस्तार से किया है। समकालीन समय में संयुक्त राज्य अमेरिका का सन् 1787 ई0 के संविधान को संघवाद का आदर्श उदाहरण स्वीकारा किया जाता है। अमेरिका का अनुसरण करते हुए स्विट्जरलैण्ड, कनाडा, आस्ट्रेलिया आदि राष्ट्रों द्वारा अपने संविधान में संघवादी व्यवस्था को अंगीकार किया। तत्पश्चात् (द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात्) अनेक राष्ट्रों ने अपनी-अपनी राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक परिवेशों के अनुरूप संघवादी शासन पद्धति को अंगीकार किया। भारत ने भी स्वतंत्रता के बाद निर्मित अपने स्वायत्त संविधान में कहा कि, भारत एक संघ (न्दपवद) होगा। यद्यपि भारतीय संविधान में ‘‘थ्म्क्म्त्।स्प्ैड‘‘ के स्थान पर श्न्छप्व्छश् शब्द का प्रयोग किया गया है, तथापि इसका आशय भी संघवादी शासन प्रणाली के रूप में स्वीकारा जाता है।



