विद्यालयी वातावरण का छात्रों की अभिप्रेरणा पर प्रभाव
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सारांशः 'अभिप्रेरणा' वह मनोवैज्ञानिक कारक है जो किसी आवश्यकता की उपस्थिति में उत्पन्न होती है और इसकी दिशा लक्ष्य की प्राप्ति की ओर निर्देशित रहती है। वुडवर्थ के अनुसार "अभिप्रेरणा व योग्यता से निष्पत्ति प्राप्त होती है प्रेरणा से व्यक्ति का विकास होता है।" अभिप्रेरणा से व्यक्ति समस्याओं के समाधान हेतु सदैव तत्पर रहता है। इसके अभाव में व्यक्ति समस्याओं के समाधान हेतु तत्परता से विमुख होता जाता है। इसके अभाव में व्यक्ति समस्याओं से घबराता है तथा उसका सामना करने से बचता है। ऐसे में समस्याएं विकराल रूप में प्रत्यक्ष हो सकती हैं। अतः अभिप्रेरणा समस्या समाधान योग्यता को कहीं न कहीं सकारात्मक रूप में प्रभावित करती है। यही कारण है कि, डॉ० ए० पी० जे० अब्दुल कलाम ने 'विजन-2020' में कहा है कि, भारत में विकास की धूरी युवा हैं और ये युवा तभी भारत को विकसित देश बना सकते हैं, जब सर्वप्रथम अपने अभिवृत्ति को परिवर्तित करना होगा कि, हम विकसित हो सकते हैं। जब तक इस अभिप्रेरणात्मक मानसिकता का विकास नहीं होगा, तब तक भारत को विकसित देश के रूप में देखने की भावना किताबों में बन्द होकर रह जायेगी।



