डा0 अम्बेडकर का दलित चेतना: राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में वैचारिक विवेचना - मनीष कुमार, डा0 उमाकांत यादव
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डा0 भीमराव अम्बेडकर ने दलित चेतना को एक सुसंगठित वैचारिक आधार प्रदान किया। उन्होंने अस्पृश्यता को केवल सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि एक संस्थागत अन्याय के रूप में परिभाषित किया। अम्बेडकर के अनुसार, जब तक दलित समुदाय राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों के माध्यम से सत्ता संरचना में हस्तक्षेप नहीं करता, तब तक सामाजिक मुक्ति संभव नहीं है। अम्बेडकर ने शिक्षा, संगठन और संघर्ष को दलित चेतना के तीन प्रमुख स्तंभों के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने दलितों को आत्मसम्मान, नागरिकता और समानता के लिए संगठित राजनीतिक संघर्ष की दिशा दी। यही वैचारिक आधार आगे चलकर दलित राजनीतिक चेतना का मूल बना।
创建时间:
2026-03-04



