भारत में मुस्लिम साम्प्रदायिकता का विकास- उमेश कुमार, डा0 राधेश्याम सरोज
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अंग्रेज भारत में मुसलमानों के उत्तराधिकारी बने थे, अतः प्रारम्भ में वे मुसलमानों को सदैव सन्देह की .ष्टि से देखते थे तथा उनकी शिक्षा, प्रशासन, व्यवसाय आदि सभी क्षेत्रों में उपेक्षित करते थे। अंग्रेजों को यह भय रहता था कि भारतीय मुसलमान कहीं अपने खोए हुए साम्राज्य को पुनः प्राप्त करने का प्रयत्न न करें। 18वीं शताब्दी के अन्त में, अरब में हुए बहावी आन्दोलन का प्रभाव भारतीय मुसलमानों पर भी पड़ा था। यद्यपि बहावी आन्दोलन की प्र.ति धार्मिक थी, किन्तु भारतीय मुसलमानों को, इस आन्दोलन ने, उनके दलित वर्ग होेने का आभास कराया था। परिणामस्वरूप, बंगाल के अनेक सर्वहारा आन्दोलनों में मुसलमानों ने भाग लिया। यद्यपि इन आन्दोलनों को सरकार ने शक्ति के द्वारा कुचल दिया, किन्तु मुसलमानों पर अंग्रेजों का विश्वास और कम हो गया। 1857 ई. में हुए प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के समय अंग्रेजों का यह विश्वास और भी .ढ़ हो गया कि भारतीय मुसलमान अपने राज्य को पुनः प्राप्त करने के लिये उत्सुक हैं।



