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प्रेमचंद और किसान आंदोलन - अभिषेक कुमार गौड

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Zenodo2026-01-19 更新2026-05-26 收录
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किसानों का प्रेमचंद के लेखन के साथ कुछ वैसा ही रिश्ता है, जैसा जिंदगी का सासों के साथ होता है। प्रेमचंद अपने समय के संभवतः अकेले ऐसे रचनाकार थे, जिन्होंने हिन्दुस्तान के समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र, दोनों को ठीक से समझा था। उनकी यही समझ उन्हें किसानों-दलितों और स्त्रियों के पक्ष में खड़ा करती है। यह महज संयोग नहीं है कि हिन्दी में प्रकाशित होने वाला उनका पहला महत्त्वपूर्ण उपन्यास ‘प्रेमाश्रम’ किसान जीवन पर आधारित है। ‘प्रेमाश्रम’ के रचनाकाल और उसी के आसपास हुए अवध के किसान आंदोलन को लेकर पर्याप्त बहसें हो चुकी हैं। यह भी स्वीकार किया जा चुका है कि, ‘‘‘प्रेमाश्रम’ के मूल उर्दू मसौदे की रचना 2 मई, 1918 ई. को शुरू होकर 25 फरवरी, 1920 को पूरी हो गई।''1 जबकि यह ऐतिहासिक तथ्य है कि अवध का किसान आंदोलन जनवरी, 1921 में शुरू हुआ। ये तथ्य बताते हैं कि प्रेमचंद उन समस्याओं को लेकर कितने सजग थे, जिनके कारण ‘अवध का किसान आंदोलन’ अस्तित्व में आया। वे पहले लेखक हैं, जिन्होंने जमींदारी उन्मूलन की बात की।

创建时间:
2026-01-19
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