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भारत-नेपाल सम्बन्ध का कूटनीतिक परिदृष्य - प्रो0 शिल्पा त्रिपाठी

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Zenodo2026-02-27 更新2026-05-26 收录
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सदियों से भारत-नेपाल का सामाजिक-सांस्कृतिक एवं राजनीतिक सम्बन्ध घनिष्ठ एवं सुदृढ़ रहा है। इसका कारण दोनों देशों की भौगोलिक सीमाएँ, ऐतिहासिक परिदृश्य, आर्थिक और सांस्कृतिक संरचना एक-दूसरे के अत्यधिक सन्निकट होना है। दोनों देश लम्बे समय से मैत्री-सम्बन्धों से भी बँधे हुए हैं। 31 जुलाई, 1950 की संधि द्वारा दोनों देश पारस्परिक शांति, सहयोग और मित्रता के सूत्र में बँधे हैं। व्यापारिक सन्धियों द्वारा इसे और अधिक सुदृढ़ता प्रदान कर दिया गया है। दोनों देशों के व्यापारिक संधियों के अनुसार, नेपाल अपने विदेशी व्यापार के लिए भारतीय सीमा का प्रयोग कर सकता है, तो भारत भी नेपाली सीमा का उपयोग कर सकेगा। किन्तु, भारत-नेपाल मैत्री सम्बन्ध कुछ समय से चीन के आँखों की किरकिरी बन गया है। वह नेपाल में चीन समर्थक और भारत-विरोधी तत्त्वों को बढ़ावा देने में लगा हुआ है। इससे नेपाल में यह विचार बल पकड़ने लगा कि, नेपाल को भारत और चीन के मध्य एक अवरोधक (बफर) राज्य की भूमिका में आ जाना चाहिए। इससे भारत-नेपाल कूटनीतिक सम्बन्धों पर व्यापक प्रभाव परिलक्षित होने लगा है। इसी दृष्टि से प्रस्तुत शोधपत्र में तथ्यों का अध्ययन-विश्लेषण किया गया है।

创建时间:
2026-02-27
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