भारत में जल संसाधन: आलोचनात्मक विष्लेषण -डा0 ओम प्रकाश यादव
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भारत में औसतन प्रतिवर्ष 1,170 मिलीमीटर (46 इंच) बारिश होती है, जो लगभग 4,000 क्यूबिक किलोमीटर (960 उप3) बारिश या हरेक वर्ष लगभग 1,720 क्यूबिक मीटर (61,000 बन जि) ताजे पानी के बराबर है।1 देश में दुनिया की 18 प्रतिशत आबादी रहती है, लेकिन उसके पास दुनिया के जल के संसाधनों का सिर्फ 4 प्रतिशत भाग है। इसके समाधान हेतु ‘इंडियन रिवर्स इंटरलिंकिंग प्रोजेक्ट’ संचालित है।2 भारत के लगभग 80 प्रतिशत भूमिगत जल में सालाना 750 मिलीमीटर (30 इंच) या अधिक बारिश से प्राप्त होती है। अधिकतर बारिश जून से सितंबर तक मानसूनी मौसम में होती है, जिसमें देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों की तुलना में उत्तर-पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों में सर्वाधिक बारिश होती है। इसके अलावा सर्दियों के बाद हिमालय में बर्फ पिघलने से उत्तरी क्षेत्र की नदियों में पानी का प्रवाह बढ़ता है। इसके विपरीत, दक्षिणी नदियों में पानी के प्रवाह में अधिक मौसमी बदलाव देखने को मिलते हैं, खासकर हिमालयी बेसिन में, कुछ महीनों में बाढ़ तो कुछ महीनों में पानी की कमी। प्रस्तुत शोधपत्र में इन्हीं विसंगतियों का विश्लेषण किया गया है।



