मार्कण्डेय के कथा साहित्य में मध्यवर्गीय समाज के विभिन्न पक्षों का अध्ययन- शारदा देवी शुक्ला, डा0 अनुज कुमार पटेल
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मार्कण्डेय जी ने अपने कथा साहित्य में स्वाधीनता कालीन ग्राम जीवन में आए हुए परिवर्तनों को वास्तविक रूप में अंकित किया है। इनके कथा साहित्य का मुख्य बिंदु गांव ही रहा है। ‘जूते’ कहानी में बालक मनोहर की दरिद्रता अंकित है। समाज और शुभ में आर्थिक विपन्नता अंधश्रद्धा विरोध का वर्णन हुआ है। वासपी की मां शहरी मध्यवर्गीय परिवेश की कहानी है। इस प्रगतिशील कहानीकार की विचारधारा के कहानी कार का उद्देश्य केवल स्वाधीनता कालीन किसान एवं मजदूर वर्ग को सचेत करना है। मार्कण्डेय का मजदूर अन्याय नहीं सहना चाहता। चेतना के कारण ही वह जो कुछ नहीं है उसे पाने में और जो कुछ है उसे बचाये रखने में प्रयत्नशील है। मार्कण्डेय की कहानियों के माध्यम से भारतीय ग्राम्य समाज के मध्यवर्ग की सामाजिक आर्थिक राजनीतिक, धार्मिक एवं सांस्.तिक स्वरूप का यथार्थ चित्रण में कथाकार का मध्यवर्ग की चेतना का व्यावहारिक एवं सैद्धान्तिक दोनों ही पक्ष देखे जा सकते हैं।



