सुभाष चन्द्र बोस की ''भारत निर्माण" सम्बन्धी वैचारिकी का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य- मयंक वर्मा, डा0 लक्ष्मण सिंह
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सामान्यतया ‘‘सुभाष चन्द्र बोस" को ‘‘नेताजी" के रूप में एक उग्र राष्ट्रवाद का प्रतिनिधित्व करने वाले क्रांतिकारी व्यक्तित्व का स्वामी माना जाता है, जिन्होंने भारत को आजाद कराने के लिए ‘‘आजाद हिन्द फौज" का गठन कर स्वतंत्रता संघर्ष में सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। किन्तु, यह नेताजी का अत्यल्प परिचय कहा जायेगा, क्योंकि वे बहु-आयामी व्यक्तित्व को धारण करने वाले व्यक्ति थे, जिन्होंने भारत को आजाद कराने की रणनीति से लेकर आजाद भारत के पुनर्निर्माण तक की योजना पर कार्य किया। बोस की नैतिक व आध्यात्मिक समझ, शिक्षा, अर्थ, समाज, राजनीति एवं दार्शनिक चिन्तन की धाराएँ, बहुलवादी सामाजिक सांस्कृतिक विचारधारा में राष्ट्रीय एकता की सोच इत्यादि अन्य राष्ट्रवादियों से उन्हें अलग करता है। बोस दृढ़ व्यक्तित्व, नेतृत्व की क्षमता, नवीन राष्ट्र निर्माण की उत्कण्टा का अध्ययन अब तक किसी अनुसंधाता द्वारा नहीं किया गया, जिससे उनके सम्यक् व्यक्तित्व एवं चिन्तनधारा का अभिज्ञान भारत के विकास के सन्दर्भित किया जा सके। प्रस्तावित शोधपत्र में इसी अनछुए पक्ष को केन्द्र में रखकर तथ्यों का विश्लेषण किया गया है।



