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दलित राजनीति की ऐतिहासिक पृृष्ठभूमि का समाजषास्त्रीय अवलोकन- प्रशान्त कुमार

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Zenodo2026-03-07 更新2026-05-26 收录
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दलित, जिन्हें अनुसूचित जातियों के रूप में भी संविधान संबोधित किया है, की भारतीय राजनीतिक पृष्ठभूमि का संधान करने के लिए इनकी राजनीति पृष्ठभूमि का समाजशास्त्रीय विश्लेषण समय की मांग है। जब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा सन् 1930 से दलितों की राजनीति परियोजना को अपने कंधों पर लिया, तब दलित वर्गों की समस्याओं का समाधान मात्र राजनीतिक शक्ति से ही नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलानों से साकार करने का प्रयास किया। इसी के साथ दलित राजनीति-सामाजिक परियोजना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि समाजवैज्ञानिकों के विमर्श का केन्द्रीय विषय बन गया। इस तथ्य का अनुसंधान प्रस्तुत शोधपत्र में द्वितीय समंकों के माध्यम से अग्रांकित तीन चरणों में विभाजित कर करने का प्रयास किया गया है- प्रथम चरण (1930 से 1956), द्वितीय चरण (1957 से 1980 तक), तथा तृतीय चरण (1980 से वर्तमान तक)।

为探析达利特(Dalit,印度宪法亦将其界定为附表种姓(Scheduled Castes))的印度政治背景,针对其政治背景开展社会科学分析已是时代所需。1930年,贝·姆·阿姆倍伽尔(Bhimrao Ambedkar)博士接手达利特政治事业,彼时其主张,解决达利特群体的相关问题,不能仅依赖政治权力,还需依托社会运动加以推进。自此之后,达利特政治与社会事业的历史背景便成为社会科学界研讨的核心议题。本研究论文尝试将该主题的研究划分为三个预先设定的阶段展开:第一阶段(1930年至1956年)、第二阶段(1957年至1980年)以及第三阶段(1980年至今)。

创建时间:
2026-03-07
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