अनुसूचित जाति महिलाओं की षैक्षणिक स्थिति- एक समाजषास्त्रीय विवेचना- कृष्णानन्द पाण्डेय
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महिलाएं परिवार के बच्चे की प्रथम शिक्षिका होती है। उनकी शिक्षा, ज्ञान और अनुभव समाज में बेहतर सुधार ला सकते हैं और साक्षरता दर बढ़ा सकते हैं। प्रस्तुत शोधपत्र में प्रारम्भिक शिक्षा के स्तर पर स्कूल और समाज में ैब् छात्राओं की मौजूदा शैक्षिक स्थिति, विभिन्न समस्याओं, अवसरों और संभावनाओं पर चर्चा की है। शोधपत्र में उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में अनुसूचित जाति की किशोर लड़कियों के सेकेंडरी एजुकेशन में दाखिला लेने और उसे पूरा करने में आने वाली रुकावटों और मदद करने वाले कारकों का भी पता लगाया गया है। अध्ययन में वर्णनात्मक सर्वेक्षण अनुसंधान और उद्देश्यपूर्ण निदर्श प्रणाली को उपयोग में लाया गया है। अध्ययन में पाया गया है कि, अनुसूचित जाति की छात्राओं को स्कूल और समाज के स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने उनकी शिक्षा जारी रखने और उनके सामाजिक दर्जे को सामान्य जीवनशैली के बराबर लाने के अवसरों को समान बनाने के लिए कुछ बड़े कदम उठाए हैं। सकारात्मक दृष्टिकोण और सही जागरूकता उन्हें सामान्य जीवन में एक बेहतर मंच दे सकती है।



