दलित राजनीति की ऐतिहासिक पृृष्ठभूमि का समाजषास्त्रीय अवलोकन- प्रशान्त कुमार
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दलित, जिन्हें अनुसूचित जातियों के रूप में भी संविधान संबोधित किया है, की भारतीय राजनीतिक पृष्ठभूमि का संधान करने के लिए इनकी राजनीति पृष्ठभूमि का समाजशास्त्रीय विश्लेषण समय की मांग है। जब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा सन् 1930 से दलितों की राजनीति परियोजना को अपने कंधों पर लिया, तब दलित वर्गों की समस्याओं का समाधान मात्र राजनीतिक शक्ति से ही नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलानों से साकार करने का प्रयास किया। इसी के साथ दलित राजनीति-सामाजिक परियोजना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि समाजवैज्ञानिकों के विमर्श का केन्द्रीय विषय बन गया। इस तथ्य का अनुसंधान प्रस्तुत शोधपत्र में द्वितीय समंकों के माध्यम से अग्रांकित तीन चरणों में विभाजित कर करने का प्रयास किया गया है- प्रथम चरण (1930 से 1956), द्वितीय चरण (1957 से 1980 तक), तथा तृतीय चरण (1980 से वर्तमान तक)।
创建时间:
2026-03-07



