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माघ मेला: उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत ' डाॅ0 उमाकान्त यादव

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Zenodo2026-04-02 更新2026-05-26 收录
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प्रस्तावनाः माघ मेला, जिसे “माघ संगम मेला” भी कहा जाता है, भारत के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है। यह विशेष रूप सेउत्तर प्रदेश के जिला प्रयागराज (त्रिवेणी संगम) में माघ मास (जनवरी-फरवरी) में आयोजित होता है। त्रिवेणी संगम, जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियाँ मिलती हैं, भारतीय धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। माघ मेला उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है, जो भारतीय सभ्यता के धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक आयामों को समन्वित रूप में प्रस्तुत करता है। माघ मेला न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का केंद्र है, बल्कि उत्तर प्रदेश कीसांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक पहचान का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। माघ मेला उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और एकता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यहाँ विभिन्न जातियों, भाषाओं, क्षेत्रों ’ असिस्टेंट प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, श्री बजरंग स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दादर आश्रम, सिकन्दरपुर, बलिया (उ.प्र.), भारतऔर संप्रदायों के लोग एक साथ आते हैं। मेला एक ऐसा मंच है जहाँ लोकगीत, नृत्य, वेशभूषा और लोक कला प्रदर्शित होती हैं। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और गांवों की सांस्कृतिक परंपराएँ मेले में जीवित होकर सामने आती हैं। यह दर्शाता है कि राज्य में विविधता के बावजूद सामाजिक और सांस्कृतिक एकता बनी रहती है।

创建时间:
2026-04-02
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