विद्यालयी शिक्षा की केन्द्रीय प्रबन्धन संस्थाएँ ' डाॅ0 मिन्नी कुमारी
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सार संक्षेपः विद्यालयी शिक्षा में अनेक विसंगतियां एवं भिन्नताएं विद्यमान हैं। इसका कारण इन विद्यालयों की प्रबन्धन संबंधी विषमताएं हैं। एक ओर राजकीय विद्यालय हैं, जिनका संचालन एवं नियमन केन्द्र एवं राज्य के विधि अनुरूप होता है, तो दूसरी ओर निजी विद्यालयों प्रबन्धतंत्र के विचार एवं मत को अधिक महत्व प्रदान करते हैं। सामान्यतया निजी विद्यालयों के प्रबन्धतंत्र द्वारा व्यावसायिक दृष्टिकोण से व्यवस्था तथा पठन-पाठन की क्रियाओं को अपनाया जाता है और भारी लाभ को अर्जित किया जाता है। इन विसंगतियों एवं विषमताओं के मध्य सत्यान्वेषण प्रस्तुत शोधपत्र में किया गया है।
创建时间:
2026-04-02



